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Good, Better or Best?

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People often come to me feeling tired and stuck. They ask, "How do I fix my life?" ​They think they need to wake up at 4 AM, run a marathon, or change everything overnight. But that usually leads to burnout. ​Real change doesn't have to be hard. In fact, for it to stick, it should be simple. Here are four easy lessons I teach my clients to help them feel happier and calmer. ​ 1. Change the Story in Your Head ​Imagine you are wearing sunglasses with dark lenses. Everything you look at—the sun, the trees, your friends—will look dark. ​Your attitude is like those glasses. If you constantly tell yourself "I’m not good enough" or "This is too hard," then your life will feel hard. ​ Try this: Notice when you are being mean to yourself. ​ Instead of saying: "I made a mistake. I’m so stupid." ​ Say this instead: "I made a mistake. It happens to everyone. I will learn from it." ​Be as kind to yourself as you woul...

जीवन नाम हे उसका...

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लम्हों को तोड़ जोड़ कर ले आए हे हम, उसे इस मुकाम तक खींच लाए हे हम... रास्तों को ढूंढते हुए, खुद को घसीट लाए हे हम, अंधेरा सा छाया हे चारो ओर, फिर भी रोशनी की जिद पर आए हे हम... चलते रहना अविरत नियम हे जिसका, पहुंचना हे जहां मुकाम हे उसका, चलना हे हमे भी साथ उसके, हाथों में सबकी लगाम हे जिसके... दिखता हे वहीं से अपना लेखा जोखा, क्या जोड़ा , क्या घटाया, क्या रखा, बना लो उसी को पहचान अपनी, जिससे हमे हिम्मत हे सिखनी... हर जगह नाम बदनाम हे जिसका, बस समज लो जीवन नाम हे उसका... जीवन नाम हे उसका...

भारत एक अनुभूति

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भावनाओं से जुड़ा एक सपना हमारा, सारे जहां में अच्छा भारत हे प्यारा... इसके तिरंगे को ऊपर जाते देख, दिल थमता हे हमारा, गर्व से भरा सीना , ये भारत देश हे प्यारा... जिसकी मिट्टी में हे सुगंध, और हवा में भरा हे जस्बा, वीरता का पुकार लगाता, ये भारत देश हे विश्वास जगाता... चंद तलवारे और मुट्ठीभर बंदूके, किया था देश का बंटवारा, फिर भी हम चट्टान से खड़े क्यूंकि, ये भारत देश हे प्यारा... बनता हे क्या बिगड़ता हे क्या, हर देशवासी में हे विश्वास हमारा, वक्त चढ़ा हर भारतवासी हे खड़ा, क्यूं???? क्यूंकि ये भारत देश हे प्यारा... ||भारत माता की जय||

સંબંધો ની ભરમાર...

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આ સંબંધો ની ભરમાર છે, સંસાર નાં આ ચક્ર ની પીડા અપાર છે... કોઈએ મને નાં પૂછ્યું, એની સહુને વ્યથા છે, પોતાના બાળકો નાં પૂછે, તો એ એમની કથા છે.... વ્યવહાર સામે વાળો કરે, એની અહીંયા સહુને ઈચ્છા છે, પણ સંબંધ ની ક્યાં કોઈને પૂછ્યા છે??... આ મારો અને આ તારો, વ્યક્તિઓ પણ આજે વહેચાય છે, પરિવાર માં પણ રમત રમે છે, રાજનીતિ નાં આ ખબર પરિવાર માં પણ વહેચાય છે... આને મને ફોન ન કર્યો, આને મારી સાથે વ્યવહાર નાં કર્યો ની પીડા છે, પોતાના ઘરના વ્યવહાર નાં કરે છતાં, બીજા નાં વ્યવહાર ની અહીં પીડા છે... ધર્મ આપણે સહુ કરીએ છે, તપનો મહિમા અપાર છે, તોય સંસાર નાં રાગ દ્વેષ માં રમતા, ધર્મ ભાવ છોડી ક્રિયા નો રમતો સાર છે, વ્યવહાર ની આ લીલા અપાર.... સંબંધો ની આ ભરમાર છે, સંસાર નાં આ ચક્ર ની પીડા અપાર છે...

चरैवेति चरैवेति, बस यही हमारा नारा हे...

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चरैवेति चरैवेति, अब यही हमारा नारा हे, रख सोच पक्की और चलता चल, देख वो कल हमारा हे.... तू ही नेता, तू ही विजेता, हर युवा में शक्ति जगाता हे, चलता चल, चलता चल, ये विश्व का कल हमारा हे.... आए आंधी, आए विपदा, भले टकराए तूफान से, कोई हमारा क्या बिगाड़े, जब हो इरादे चट्टान से... तू ही मित्र, तू ही चित्र, संघर्ष हमारा चरित्र हे, पूछ रहा ये देश मेरा, क्या इस मिट्टी में अब भी वो जान हे.....

ये देश मेरा चट्टान सा...

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लड़ता रहा, अपनी आन को, झेलता रहा, तूफान को, न मिटा कभी, न झुका कभी, ये देश मेरा चट्टान सा.... आए कई मुगल यहाँ, बिलबिलाए अंग्रेज जहां, लड़ता रहा इंसान सा, ये देश मेरा चट्टान सा.... हिंदू बने, मुसलमान बने, बने ईसाई सिक्ख जहा, जब आई मुसीबत आन पर, फिर खड़ा ये देश मेरा चट्टान सा.... आए कई ललकारने, मेरी मां की हिम्मत मारने, न हिला सके, न मिटा सके, ये देश मेरा चट्टान सा... कुछ बात हे इसकी आन में, न हुई कमी कुछ शान में, मेरी भारत मां के सम्मान सा, ये देश मेरा चट्टान सा... ।। भारत माता की जय।।

जीवन इसी का नाम हे...

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तूफान हे, चट्टान हे, मुश्किलों का पैगाम हे, जल रही हे ज्वाला कई, जीवन इसी का नाम हे.... मिलना यही, बिछड़ना यही, होता यहां ये आम हे, इंसान का कोई हे कहां, जीवन इसी का नाम हे.... मंजिल यहां, रास्ता यहां, रुकना न तेरा काम हे, चलता चल तू ए मुसाफिर, जीवन इसी का नाम हे... कर हौंसला, ले फैसला, खुला हुआ आसमान हे, जिगरा बना तू बाज सा, जीवन इसी का नाम हे... चलना भी हे, उड़ना भी हे, यही तेरी पहचान हे, सफर यही जीने की वजह बना, जीवन इसी का नाम हे...

वसुधैव कुटुंबकम् ...

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Hello Friends Sorry to be away from this blog long time,  But this time i am here with some Family sentiment which is our Sanskruti our tradition in Bharat...i.e. वसुधैव कुटुंबकम्... More of my young friends yet dont know that from the oldest time of ancestors our Nation is following the tradition of Vasudaiv Kutumbakam...  What is Vasudaiv Kutumbakam? So to start with Vasudaiv Kutumbakam in one line clarifies as the whole world and its each and evey creation is our family...we tend to treat all of them equally and wants to live together... As we are attached to all in our home, same way we are attached to everyone living with us... The basic aim of creating this emotion was to create a Unity and brotherhood among all the human beings which will conclude at a peace and love in whole universe... As per our history it is seen that all our saints and Legends have travelled to diffrent parts of the world with single message of 'Love, Peace & Brotherhood.' Our ances...

ड्रग्स और भविष्य

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आज कुछ दिनों बाद फिर कुछ लिखने की इच्छा हुई तो फिर से आप सब के समक्ष कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता हु, जो की आज कल युवाओ में एक दूषण बन चूका हे और पूर्ण सत्य जानने के बाद भी युवा उसका सेवन करते हे। ...  में बात कर रहा हु समाज के सबसे बड़े विरोधी और स्वस्थ हानिकारक पदार्थ ड्रग के बारे में  वर्तमान में जाने माने अभिनेता शाहरुख़ खान के पुत्र आर्यन खान की ड्रग्स के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद फिर से यह विषय सुर्खियों में हे, परन्तु हम सब जानते हे की यह कोई आज कल की समस्या न होते हुए वर्षों से चली आ रही गंभीर समस्या हे... यह कोई नयी बात नहीं हे की युवा इन हानिकारक पदार्थो का सेवन करते हे, और पिछले कुछ वर्षो में इसका प्रमाण जानकारी के उपरान्त भी बढ़ता गया हे और आज यह समाज के स्थानिक इलाको में आसानी से प्राप्त हो रहा हे. इस विषय में बहोत बार चर्चाए हुई, कुछ दिन इसके विरोध में अभियान चले पर फिर वापस इस विषय पे पर्दा दाल दिया जाता हे और कोई बड़ी हस्ती के पास पाए जाने पे यह विषय वापस चर्चा में आ जाता हे, पर ऐसा क्यों की जब कोई हस्ती के पास हो तभी उस की चर्चा हो? , क्या समाज के सामा...

महाराष्ट्र की वर्तमान राजनैतीक परिस्थिती

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नमस्ते, काफि समय बाद आज वापस लिखने के लिये आप सभी से क्षमा चाह्ता हुं, हालाकी मेरी राजकारण में सक्रिय भुमिका होने की वजह से कुछ वर्तमान परिस्थिती और उसकी मुझे दिखी प्रतिक्रिया यहा लीख रहा हुं. हर बार की तरह एक अनुभव से शुरु करूँगा, गत दिनो में महाराष्ट्र में चल रहे अती भीषण सरकार विरुद्ध पोलिस के युद्ध के बारे में कुछ चर्चा एक चाय की टपरी पे शुरु की ताकी जनता की कुछ प्रतिक्रिया जान सकु, चर्चा करते हुए सभी मे एक बात सामान्य दिखी की ये महाराष्ट्र मे हो क्या रहा हे?, अगर गृहमंत्री एक शहर में एक महिने का 100 करोड मांग रहे हे तो बाकी महाराष्ट्र का कितना होगा? ये भ्रष्टाचार बंद होना चाहिये, यह परिस्थिती अती विकट हे अगर इसका कुछ किया नहि गया तो देश बरबाद हो जायेगा. अब क्युकी में स्वयं राजकारण में होणे की वजह से उत्तर अपेक्षीत था, तो इसी बात पे मेरे कुछ विचार और मंतव्य यहा रखना चहुंगा..... मेरा सब से पहेला सवाल सभी से यही रहेगा की जो परिस्थिती हम अभी महाराष्ट्र में देख रहे हें क्या ये हमारे लिये नयी हे?????????? हमने 10 लाख करोड के घोटाले देखे हे, हमने 2जी स्पेक्ट्रम कौभांड़ देखा हे...

में फिर लौट के आऊंगा

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कुछ अंधेरे बादलो ने जकड़ लिया, निराशा ने यु पकड लिया, फिर भी हार न मानूँगा, में फिर लौट के आऊंगा...... बदल गये लोग अचानक से, हो गई हालात भयानक सी, फिर भी होश न खोउंगा, में फिर लौट के आऊंगा..... अब भी कुछ सिखना बाकी हे, राजनिति की ये रीत पुरानी हे, भरोसा न कर पाउंगा पर, में फिर लौट के आऊंगा.... अपने जस्बातो से जूज रहा, कुछ अपनो की बातो से टुट रहा, अपना अपमान न सह पाउंगा पर, में फिर लौट के आऊंगा..... कुछ काम में हू अटक गया, फिर हालातों में भटक गया, अपनी इच्छाशक्ति को जगाउंगा, में फिर लौट के आऊंगा..... बदल गये लोग अचानक से, फिर भी होश न खोउंगा, में फिर लौट के आऊंगा.......

इस मिट्टी में कुछ तो अलग बात हे...

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हे मां तेरी मिट्टी में कुछ तो अलग बात हे, जो जगाती हर सिने मे देशभक्ति की आग हे... हुए कई न्योछावर तुझ मुक्ति को, जगाती जोश ये युवा शक्ती को, खुद जल के इस राष्ट्रभक्ती का, सजाया आंगन ये आज हे. क्रांतिकारी ओर कई वीरों को, इस मिट्टी ने जनम दिया, जिसने भी की कोशिश इसको तोडने की, उस दुश्मन का पतन किया. भाषा प्रांत धर्म का ये अद्भूत संगम हे, बनता जिस से सुरों का साझ हे, सर्व शक्ती से बना गीत राष्ट्र का, लहराता तिरंगा आज हे.... दृढ संकल्प ले सीने में, बढता युवा का साथ हे, फिर शिखर पे लाना हे तुझ मस्तक को, ये भारत की आस हे।। हे मां तेरी मिट्टी में कुछ तो अलग बात हे।।

क्युकी वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे।

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कल तक जो प्यार जता रहे थे आज वो नफरत बता रहे हे, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हें।। होता था संपर्क, करते थे रोज़ बात, होती थी मुलाकात, दिन हो या रात, अब वो हम से कतरा रहे हे, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... बना रहे थे संगठन, सब को साथ ले चल रहे थे, कोई कुछ कहे संगठन के साथ रह रहे थे, आज वो सिर्फ अपने उत्पादनो का साथ दे रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... जब तक थे उनके उत्पादनों के साथ, बेचते रहे उन्हे अपने हाथ, तब तक हर जगह प्यार जता रहे थे, अपने साथ बता रहे थे, जैसे ही छुटा उत्पादनों का साथ, हमें उपेक्षा जता रहें हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... संगठन मे था मशहूर, जिस आंगन का नाम, वहा के फुल कम हुए जा रहे हें, अपने स्वार्थ को संगठन का नाम दिये जा रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे... कुछ तो बदला हे नाम कल ओर आज में, स्वार्थ की वजह से नेंतृत्व का समाज में, फिर भी हम उसे चला रहे हें, अपना उन्हे बना रहे हें, क्युकी अब वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहे हे...

देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा

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देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा।। आयी कुछ विपदा ऐसी, जो देश मेरा जला रही, पर चटटानो सी मजबुत इमारत, वो अभी न हिला सकी..... लग गई बन्दिशे, खो गया कारवां, हो गया कुछ ऐसा, थम गया ये देश मेरा..... पर हर जन मे हे विश्वास, कुछ करने की सब दिल मे हे आस, फिर वही किलकारी गूंजेगी, कर रहा हर इन्सान यही प्रयास... सब मिलेंगे साथ साथ, करेंगे एक नया ध्येय, लेके सबका साथ ओर विश्वास, लिखेंगे हम सुवर्ण अध्याय..... देश मेरा अभी लड़ रहा, फिर नया यूं बन रहा।।।

मंजिल

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दर्द सा दबा था दिल मे, कुछ ना लग रहा था अच्छा जगमे... बन गयी थी वीरान ज़िन्दगी, कर के अपने सफलता की बन्दगी... समज न आया किस तरह उसे समज़ाऊ, कैसे इस से बाहर लाऊ... आखिर एक उपाय आजमाया, उसे जोश सा एक गीत सुनाया, एक लौ बनायी जलती आग सी, जिसने बना ली उसने जीने की आस सी.... कहा उसे अपना एक सपना बना, उसके साथ जीने को अपना बना, बना वो हुनर खुद मे, की अपने सपने का तू ही रास्ता बना... रख वो अंदाज़ जीने का, अपने इस चौडे सिने का, दूर दिखे मंज़िल जो तुझे, उसे खिंच के लाना हे तुज़े ... कर्तव्य पथ से बना वो इतिहास, हर कोई करे बस ऐसी आस, बन जाऊ मे भी वो दिल की हौंश, जिसमे था मंजिल खिंच लाने का जोश...

Do Bharat really has become equal for everyone??

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Lets directly come to the point this time as i feel this topic doesn't need any precap or defination. we know from our birth that the topic of equalism is being raised by Many social activists of the Bharat. which has been reduced as well in broader way but than to today if i ask you all that, Do you Really feel that Bharat has become Equal for everyone?? if you ask me than my answer will be not yet, it has a long to go... now all will ask how?? as todays generation is now coming out of the castism, feminism & other poor rich thinking so we have moved towards equalism , but here my quastion is, does equalism defines only for this three things?? lets go to the things i feel should also come in equalism,  to start with my own small experiences, while travelling to other state with my own vehicle i was been stopped by the police officer & being asked why you are here in this state?? being astonished by his question my prompt reaction was, do i have to...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) - १

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आज जीवन में आये एक अनुभव व् उस पे मेरी प्रतिक्रिया का एक वाकिया आप के सामने रखने जा रहा हु.. कुछ साल पहले मिड डे  जैसे बड़े वर्तमान पत्र में संघ के बारे में कुछ विषय रखा गया था जो वास्तविकता से बहोत ही अलग था. उसी बारे में मेरे कुछ विचार रखने की कोशिश एक वृत्तपत्र के माध्यम से की थी जिसके कुछ अंश अलग भागो में रखने का प्रयत्न कर रहा हु.  मिड डे से अगर शुरू करे तो प्रथम वाक्य ही कुछ अर्थ विघटन किया हुआ लगा, लिखा हे की..... राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की स्थापना १९२५ में गांधीजी एवं कांग्रेस की कल्पना के भारत का विरोध करने की गई थी...  पर जहां तक मैंने संघ की शाखा में सूना हे या किताबो में पढ़ा हे उसमे संघ की स्थापना भारत की आर्य संस्कृति एवं भारतीय प्राचीन जीवनशैली के विचारो की रक्षा करने के लिए की गई थी. जब की संघ के प्रथम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी स्वयं कांग्रेस के कमिटी के सदस्य रहे थे. परन्तु भारत को इंडिया बनते देख राष्ट्र की प्राचीन संस्कृति की रक्षा हेतु दूरंदेशी विचार कर, एक बिनराजनैतिक संगठन की आवश्यकता को देख, उस वक़्त के सबसे ब...

मेरी किताब में.....

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मेरी किताब में अब भी वो कहानी हे, मेरे देश में वो वीरता फिर जगानी  हे ....... वीर शिवाजी की वो हिन्दवी स्वराज की दहाड़ हे, वही अफ़ज़ल के करहाने की चीत्कार हे... मेरी किताब में.... कुछ शौर्य गाथाएं महाराणा की लड़ाई की हे, पर बाधाएं जयचंदो से गद्दार की हे.... मेरी किताब में.... सौम्यता की मूरत प्रभु महावीर हे, तो शौर्य के प्रतिक श्री कृष्ण हे, मेरी किताब में.... जहा लड़ी थी मर्दानी वो झांसी वाली रानी हे, वही हसते हुए फांसी चढ़ते भगत सिंह की कहानी हे, मेरी किताब में.... वही कहानी फिर सूना ने लाया हु, इस किताब के ज़रिये यह देश जगाने आया हु... बहुत थी देशप्रेम की ज्वाला जो अब फिर से जगानी हे, वही मेरे भारत की शान , विश्व वल्लभ में लहरानी हे... मेरी किताब में अब भी वो कहानी हे...

Government Policies are Usefull or Fake?

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I know this topic is quite tregic & somewhat Political in times but have to be seen as its a time to think positive with the thoughts & initiatives shown by government side... till what time we will be sit with the mindset of Govt. not doing anything? & if not doing than right now is the time to make them do it this time.... so lets begin with the thing as said by govt. that they are working best for the enhancement of Citizens of India. as the most promoted thing by the prsent government is their policies made for betterment of Citizens... is this Policies really Usefull or Fake? from the year of 2014 when the Government was changed it was said that we will be concentrating first on the basic needs of citizen still left from. Policies Named Saubhagya Yojana & Swachch Bharat Abhiyaan was initiated which right now shows the statistic of 2,62,84,360 household electrified(till write up of this article) & 10,29,77,442 toilets are built(till write up of ...

Is Political Curiosity Increasing in Youth?

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Hello Friends, Today i am here with a hot & crucial topic of Present Time.... Is Political Curiosity Increasing In Youth? For some ease let's see one small incident happened with me in recent time... I was doing my project in one of the reputed college of VileParle, Mumbai.. while doing it got a chance to talk with students, as because of very small age difference was easier to talk & i started a topic of election & diverted it to Political Leaders... Now the biggest shock for me was, they were more enthusiastic to talk about it & they started giving the statistics which are hardly known by common voters... This incident made me think twice that is it the same youth which use to hate politics at one point of time??? What is the reason of this change?? Why youth is taking so much interest in politics?? I talked personally with some of the students who were able to give accurate statistical data of some govt. Policies & governance percentage...this mad...